Friday, March 9, 2018

मेरा भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी को पत्र. My Letter to Prime Minister of India Narendra Modi Ji.

पशुपालकों के हितार्थ मेरा भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी को पत्र.
My Letter to Prime Minister of India Narendra Modi Ji: For the cause of Animal Husbandry people.
Registration Number: PMOPG/E/2018/0109477
PMOPG/E/2018/0450414 



माननीय प्रधानमंत्री महोदय, आपको मैं पहले भी भा. कृषि अनुसंधान परिषद और केंद्रीय पशुपालन विभाग में दशकों से चले आ रहे प्रतिवर्ष हज़ारों करोड़ के फंड के वारे-न्यारे के बारे में कई बार लिख चुका हूँ जिससे पशुपालकों को प्रतिवर्ष, सरकारी आँकड़ो के अनुसार, 20 हज़ार करोड़ का प्रत्यक्ष एवं इतना ही अप्रत्यक्ष नुकसान तो सिर्फ एक बीमारी FMD से होता है और इससे कहीं ज्यादा ब्रूसल्लोसिस (जो गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर आदि में गर्भपात, नवजातों की मृत्यु, घुटनो के रोग, तथा मनुष्यों में भी अनेक रोग का कारण है) से होता है. और दोनो विभाग अपने अपने घर भरने में व्यस्त हैं. एक बार पुन: आपको वो पत्र प्रेषित कर रहा हूँ जिसे मैं भा. कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्रा को तीन बार भेज चुका हूँ परंतु उत्तर तो क्या संज्ञान तक नही लिया है. महोदय इस संबंध में आपके तुरंत हस्तक्षेप की महती आवश्यकता है. 
मेरा पत्र जो धूल फाँक रहा है आपके सामने है, उम्मीद है किसानों और पशु पालकों के हित में अवश्य विचार करेंगे.

महानिदेशक जी आपसे डेढ़ साल पहले निवेदन किया था आदरणीय महोदय अब तो कृपा करके बता दीजिए कि:-

1. एक साल में दो और तीन बार टीकाकरण के बाद भी मुँह पका खुर-पका रोग क्यों फैल रहा है, वो भी वैक्सीन लगने के आठ-दस बाद ही,  क्या रोग का कारण वैक्सीन ही है. यह रोग ना सिर्फ़ पशुपालकों के पशुओं में बल्कि पशु विज्ञान के प्रतिष्ठित संस्थानों में भी आए दिन फैलता है. जैसे कि

-भा. पशु. चिकित्सा अनु. संस्थान बरेली में, मुक्तेश्वर में.

-रा. डेरी अनु. संधान संस्थान करनाल में

-तनुवास चेन्नई में

-मिलिटरी डेरी फार्म मेरठ में

--वेट. कॉलेज लुधियाना में.

-FMD फ्री स्टेट आंध्रप्रदेश, पंजाब, तेलंगाना में

-22 राउंड टीकाकरण के बाद भी उ. प्रदेश में, हरयाणा में, झारखंड में

-हर उस छेत्र में जहाँ FMD-CP पिछले 10-15 साल से चल रहा है.

2. महानिदेशक जी भा. कृषि अनु. संधान परिषद के कई संस्थानों में FMD पिछले 10 साल में लगातार टीकाकरण के बाद भी सैंकड़ों पशुओं को लील चुका है, करोड़ों रुपये का उत्पादन खा चुका है और आपका ठेकेदार संस्थान लगातार वैक्सीन को उच्च गुणवत्ता का भी बता रहा है. परंतु कभी भी किसी फार्म इंचार्ज, किसी निदेशक पर तो दूर किसी घटिया वैक्सीन बनाने वाली कंपनी पर भी कार्यवाही क्यों नहीं हुई, उन्होने आख़िर कौन सा टानिक आपको पिलाया हुआ है?

3. वैक्सीन की गुणवत्ता जाँचने का ठेका आपके भा. पशु चिकित्सा अनु. संधान संस्थान का है, क्यों नहीं नियमानुसार वैक्सीनों की जाँच हो रही है.  किसी एक बैच वैक्सीन की भी कभी हुई है तो सबूत देने की कृपा करें? वैक्सीन की जाँच में, सैंपलिंग में, सैंपलों के रख-रखाव के, जाँच के वे सारे नियम जो भारतीय फार्माकोपिया में लिखे गये हैं क्यों नही लागू होते आपके संस्थान में?

4. मेरे द्धारा  दी गई वैक्सीन गुणवत्ता रिपोर्ट पर डा. गयाप्रसाद की समिति द्धारा दी गई झूठी रिपोर्ट पर क्यों नहीं कार्यवाही हो पा रही? डा. गयाप्रसाद की समिति द्धारा दी गई झूठी रिपोर्ट के बारे में RTI के तहत दी गई जानकारी के अनुसार वो रिपोर्ट कभी भी मान्य नहीं हुई और किसी को कभी दी भी नहीं गई, फिर कैसे

-वो रिपोर्ट DAHDF द्धारा इलाहाबाद हाई-कोर्ट (लखनऊ ) में यह कहकर जमा कर दी गई कि रिपोर्ट मान्य है, क्यों, कैसे?

-IIL हैदराबाद ने मेरे उपर डा. गयाप्रसाद की समिति द्धारा दी गई झूठी रिपोर्ट को सबूत के तौर पर लगाकर केस किया गया, क्यों, कैसे?

5. आप के संस्थानों में ही जब वैक्सीन लगाने से ब्रुसेल्लॉसिस और PPR कंट्रोल नहीं हो पाई तो इन झूठे प्रोग्रामों को आपकी संस्तुति पर देशभर में चलाकर पशुपालकों को धोखा क्यों दिया जा रहा है?

6. आप कहते हैं कि PPR वैक्सिनेसन पर खर्च किया गया एक रुपया 70 रुपये का लाभ देता है तो क्यों नहीं ये वैक्सीन इसे बनाने वाले और आपके दूसरे संस्थानों के पशुओं में में लगाई जा रही? क्योंकि जहाँ जहाँ भी ये वैक्सीन लगती वहाँ वहाँ रोग होने की संभावना बढ़ जाती है, या रोग हो जाता है.

आप और आपके संस्थान भारत के ग़रीब पशुपालकों को क्यों धोखा दे रहे हैं?

भा. कृषि अनु. संधान परिषद के महानिदेशक महोदय, वर्षों से आपकी इन मामलों में चुप्पी और कार्यवाही ना करना  आपका इनमें परोक्ष या अपरोक्ष रूप से शामिल होना सिद्ध कर रहा है. आपसे अनुरोध है कि घोटाले करके पैसे पैदा करने के और भी अनेक रास्ते हो सकते हैं कम से कम ग़रीब किसानो को बख़्श दीजिए, ये ही इस देश की जीवन रेखा हैं, ये ही नहीं रहेंगे तो घोटाले कैसे होंगे?
आपका 
भोज राज सिंह 
विभागाध्यक्ष पशु जानपदिक रोग विभाग
भा. पशु रोग अनु. संधान संस्थान, इज़्ज़त नगर बरेली, उ. प्र.


प्रधानमंत्री महोदय यदि मिलने का समय दें तो सारे साक्ष्य आपके सम्मुख प्रस्तुत करने में मैं अपना सौभाग्य समझूंगा. कृपा करके एक बार पशुपालकों एवं भारत के ग़रीब किसानों के हित में अवश्य विचार करिएगा.

Response from PMO, Headed by the Most Honest and Nationalist Leader of India.
No Action Required.

Registration Number:PMOPG/E/2018/0109477
Name Of Complainant:Bhoj Raj Singh
Date of Receipt:10 Mar 2018
Received by:Prime Ministers Office
Forwarded to:Prime Ministers Office
Officer name:Shri Ambuj Sharma
Officer Designation:Under Secretary (Public)
Contact Address:Public Wing
5th Floor, Rail Bhawan
New Delhi110011
Contact Number:011-23386447
e-mail:ambuj.sharma38@nic.in
Grievance Description:माननीय प्रधानमंत्री महोदय, आपको मैं पहले भी भा. कृषि अनुसंधान परिषद और केंद्रीय पशुपालन विभाग में दशकों से चले आ रहे प्रतिवर्ष हज़ारों करोड़ के फंड के वारे-न्यारे के बारे में कई बार लिख चुका हूँ जिससे पशुपालकों को प्रतिवर्ष, सरकारी आँकड़ो के अनुसार, 20 हज़ार करोड़ का प्रत्यक्ष एवं इतना ही अप्रत्यक्ष नुकसान हो रहा है. और दोनो विभाग अपने अपने घर भरने में व्यस्त हैं. एक बार पुन: आपको वो पत्र प्रेषित कर रहा हूँ जिसे मैं भा. कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्रा को तीन बार भेज चुका हूँ परंतु उत्तर तो क्या सन्ग्यान तक नही लिया है. महोदय इस संबंध में आपके तुरंत हस्तक्षेप की महती आवश्यकता है. मेरा पत्र जो धूल फाँक रहा है आपके सामने है, उम्मीद है किसानों और पशु पालकों के हित में अवश्य विचार करेंगे. महानिदेशक जी आपसे डेढ़ साल पहले निवेदन किया था आदरणीय महोदय अब तो कृपा करके बता दीजिए कि:- 1. एक साल में दो और तीन बार टीकाकरण के बाद भी मुँह पका खुर-पका रोग क्यों फैल रहा है, वो भी वैक्सीन लगने के आठ-दस बाद ही, क्या रोग का कारण वैक्सीन ही है. यह रोग ना सिर्फ़ पशुपालकों के पशुओं में बल्कि पशु विज्ञान के प्रतिष्टिस्थित संस्थानों में भी आए दिन फैलता है. जैसे कि -भा. पशु. चिकित्सा अनु. संस्थान बरेली में, मुक्तेश्वर में. -रा. डेरी अनु. संधान संस्थान करनाल में -तनुवास चेन्नई में -मिलिटरी डेरी फार्म मेरठ में --वेट. कॉलेज लुधियाना में. -FMD फ्री स्टेट आंध्रप्रदेश, पंजाब, तेलंगाना में -22 राउंड टीकाकरण के बाद भी उ. प्रदेश में, हरयाणा में, झारखंड में -हर उस छेत्र में जहाँ FMD-CP पिछले 10-15 साल से चल रहा है. 2. महानिदेशक जी भा. कृषि अनु. संधान परिषद के कई संस्थानों में FMD पिछले 10 साल में लगातार टीकाकरण के बाद भी सैंकड़ों पशुओं को लील चुका है, करोड़ों रुपये का उत्पादन खा चुका है और आपका ठेकेदार संस्थान लगातार वैक्सीन को उच्च गुणवत्ता का भी बता रहा है. परंतु कभी भी किसी फार्म इंचार्ज, किसी निदेशक पर तो दूर किसी घटिया वैक्सीन बनाने वाली कंपनी पर भी कार्यवाही क्यों नहीं हुई, उन्होने आख़िर कौन सा टानिक आपको पिलाया हुआ है? 3. वैक्सीन की गुणवत्ता जाँचने का ठेका आपके भा. पशु चिकित्सा अनु. संधान संस्थान का है, क्यों नहीं नियमानुसार वैक्सीनों की जाँच हो रही है. किसी एक बैच वैक्सीन की भी कभी हुई है तो सबूत देने की कृपा करें? वैक्सीन की जाँच में, सैंपलिंग में, सैंपलों के रख-रखाव के, जाँच के वे सारे नियम जो भारतीय फार्माकोपिया में लिखे गये हैं क्यों नही लागू होते आपके संस्थान में? 4. मेरे द्धारा दी गई वैक्सीन गुणवत्ता रिपोर्ट पर डा. गयाप्रसाद की समिति द्धारा दी गई झूठी रिपोर्ट पर क्यों नहीं कार्यवाही हो पा रही? डा. गयाप्रसाद की समिति द्धारा दी गई झूठी रिपोर्ट के बारे में RTI के तहत दी गई जानकारी के अनुसार वो रिपोर्ट कभी भी मान्य नहीं हुई और किसी को कभी दी भी नहीं गई, फिर कैसे -वो रिपोर्ट DAHDF द्धारा इलाहाबाद हाई-कोर्ट (लखनऊ ) में यह कहकर जमा कर दी गई कि रिपोर्ट मान्य है, क्यों, कैसे? -IIL हैदराबाद ने मेरे उपर डा. गयाप्रसाद की समिति द्धारा दी गई झूठी रिपोर्ट को सबूत के तौर पर लगाकर केस किया गया, क्यों, कैसे? 5. आप के संस्थानों में ही जब वैक्सीन लगाने से ब्रुसेल्लॉसिस और PPR कंट्रोल नहीं हो पाई तो इन झूठे प्रोग्रामों को आपकी संस्तुति पर देशभर में चलाकर पशुपालकों को धोखा क्यों दिया जा रहा है? 6. आप कहते हैं कि PPR वैक्सिनेसन पर खर्च किया गया एक रुपया 70 रुपये का लाभ देता है तो क्यों नहीं ये वैक्सीन इसे बनाने वाले और आपके दूसरे संस्थानों के पशुओं में में लगाई जा रही? क्योंकि जहाँ जहाँ भी ये वैक्सीन लगती वहाँ वहाँ रोग होने की संभावना बढ़ जाती है, या रोग हो जाता है. आप और आपके संस्थान भारत के ग़रीब पशुपालकों को क्यों धोखा दे रहे हैं? भा. कृषि अनु. संधान परिषद के महानिदेशक महोदय, वर्षों से आपकी इन मामलों में चुप्पी और कार्यवाही ना करना आपका इनमें परोक्ष या अपरोक्ष रूप से शामिल होना सिद्ध कर रहा है. आपसे अनुरोध है कि घोटाले करके पैसे पैदा करने के और भी अनेक रास्ते हो सकते हैं कम से कम ग़रीब किसानो को बख़्श दीजिए, ये ही इस देश की जीवन रेखा हैं, ये ही नहीं रहेंगे तो घोटाले कैसे होंगे? आपका भोज राज सिंह विभागाध्यक्ष पशु जानपदिक रोग विभाग भा. पशु रोग अनु. संधान संस्थान, इज़्ज़त नगर बरेली, उ. प्र. प्रधानमंत्री महोदय यदि मिलने का समय दें तो सारे साक्ष्य आपके सम्मुख प्रस्तुत करने में में अपना सौभाग्य समझूंगा. कृपया करके एक बार पशुपालकों एवं भारत के ग़रीब किसानों के हित में अवश्य विच्छार करिएगा.
Current Status:Closed (NO ACTION REQUIRED)
Reason:Others
Your Feedback:
Poor
Date of Action:14 Mar 2018
Details:sent to concerned unit

11 comments:

  1. ग़रीब किसान तो आत्महत्या कर ही रहें है लेकिन अब ऐसा लगता है कि कृषि भवन और कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड मिल कर वैज्ञानिकों को भी आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर रहे हैं!

    ReplyDelete
  2. मेरे कई पत्र धुल फाक रहे है pmo portal पर

    ReplyDelete
    Replies
    1. वहाँ एक सार्वभौमिक उत्तर है - "एक्शन नॉट रिक्वायर्ड"

      Delete
  3. A Courageous letter from a Very Courageous Scientist to the most Courageous P. M! Eager to see a logical conclusion and impartial probe!

    ReplyDelete
    Replies
    1. I was enthralled when PM said na khaouga na khane dunga!there seems to be more than he could handle in his hands.Though we all can never doubt his intention,its only so much cleaning can be done with limited hours and unwilling team. If we veterinarian show integrity in deeds just like Bjoj Raj Singh. from IVRI.These issues of in appropriate use of funds,vested interests, are plaguing our country .A holistic approach is needed for farmers betterment and animal welfare as well as for human health.If any one dreams of clean India he should be able to take sides and in full fledged fight. No battle can be won halfheartedly that is what Parth said to Arjuna .Even if in opposite team you see your own brothers you should be able to clean bold them .If that sacrifice is required for betterment of masses the poor people in our country we should be willing to fight by all our might.Give me army of 10 veterinarians from each state all bribery and corruption can be sorted out from Animal Husbandry,Dairy fisheries and agriculture department.I fought my own fight while i was working .When one fight alone he/she is bound to get BP/ Heart or head problems.Iron can be cut by iron ,so war of money need money.War of knowledge needs knowledge to counter attack .When we think India we should think with collective consciousness.God needs to come down for of this country to be clean again.

      Delete
  4. Nothing to say because no body is bothered to this mera Bharat mahan

    ReplyDelete
  5. Income from animal HUSBANDRY comes under Agriculture when counter for GDP but fir other as equipment and ELECTRICITY norms the farmer is a commercial trader and he has to pay full gst and give commercial bill on ELECTRICITY and watet

    ReplyDelete
  6. भारत के प्रधानमंत्री का कार्यालय एक रहस्यमय कार्यालय है ब्लैकहोल की तरह जहाँ प्रकाश की किरणें भी ग़ायब हो जाती हैं चिट्ठी तो बहुत मामूली सी चीज है । हमने अब अब उस ब्लैक होल की ओर देखना बंद कर दिया है ।

    ReplyDelete
  7. किसी देश में वैज्ञानिक भ्रष्टाचार होता रहे,
    निष्ठावान वैज्ञानिक
    प्रधानमंत्री कार्यालय को चिट्ठी लिखते रहें
    और उनकी चिट्ठी पर
    किसी कार्यवाही की आवश्यकता न समझते हुये
    मामला क्लोज़ कर दिया जाय
    तो ऐसे देश में
    विकास की गति और स्थिति
    कैसी हो सकती है
    यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है ।

    "न खाऊँगा न खाने दूँगा" की उद्घोषणा
    वीरगति को प्राप्त होती रहे
    ठीक वैदिक उद्घोषणाओं की तरह...
    और "सत्यमेव जयते" की कामना
    कभी न हो पाती हो पूर्ण
    पराजित होता रहे सत्य
    और भरा रहे अमृत
    केवल रावण की नाभि में ।
    अभी अंत नहीं हुआ है
    नम्बी नारायण की
    यातना कथा का
    हम
    केवल चीत्कार कर सकते हैं
    या फिर पलायन करने को विवश हो सकते हैं
    भाग सकते हैं मथुरा से
    कृष्ण की तरह ।
    चलो !
    किसी समुद्र में हम भी बसा लें
    एक और द्वारिका ।

    ReplyDelete
  8. मेने मार्च 2018 से अब तक 4बार शिकायत करी PMOPG पर जो एक पुलिस के खिलाफ है कार्य वाही के नाम पर कुछ होता तो है पर पुलिस उसमें कुछ भी लिखकर शिकायत बंद कर देती है एकशन कुछ होता नहीं pmo house से कोई नहीं केवल एक चिठ्ठी बनादी जाती है ना कोई अधिकारी पुलिस से नहीं पुछता ओर अपने देश कि पुलिस कैसी है सब जानते है आए दिन मिडिया पर आते हैं किसी कोई मतलब नहीं चाहे किसी का परिवार बर्बाद हो जाए एक एफआईआर पर पुलिस 10 महिने से कुछ नहीं कर रही

    ReplyDelete