Thursday, July 30, 2026

The Dirty Business of Cow Urine in India (भारत में गौमूत्र का गन्दा धंधा)

                                                         भारत में गौमूत्र का गन्दा धंधा

आप लोग दूध के काले धंधे के बारे में अच्छी तरह जानते हैं, भारत में नकली दूध, नकली पनीर, नकली खोआ और नकली घी असली से ज़्यदा बिकते हैं, परन्तु क्या आप जानते हैं कि भारत में गौमूत्र का भी अरबों का धंधा है, मजे की बात है कि वर्तमान मोदी सरकार के आने के बाद से यह धंधा दिन दूना रात चौगुना बढ़ा है परन्तु कभी किसी ने नहीं सोचा कि जो वस्तु मनुष्यों में दवा और टॉनिक के नाम पर बिकती है उसके लिए कोई गुणवत्ता तथा सुरक्षा मानक ना हैं कोई सोच रहा है. कोई नहीं जानता कि गौमूत्र के नाम पर बिकने वाला द्रव्य गौमूत्र है भी कि नहीं, उसमें कितने हानिकारक पदार्थ और जीवाणु हैं, आप उसे पीकर या उससे बनी गोलियां खाकर स्वस्थ होंगे कि बीमार (https://www.telegraph.co.uk/global-health/science-and-disease/cow-urine-drink-india-ayurveda-medicine-harmful/).

मूत्र चाहे जिसका हो है तो शरीर से निकला हुआ वो अपशिष्ट जिसे शरीर ने हानिकारक मानकर शरीर से बाहर फेंक दिया है कई वैज्ञानिक शोधों में यह निकलकर आया है कि गौमूत्र में ना केवल हानिकारक जीवाणु और रोगकारक रोगाणु होते हैं (DOI: 10.31080/ASMI.2024.07.1358), उसमे हानिकारक मात्रा में हैवी मेटल, केमिकल (doi: 10.1016/j.heliyon.2021.e06693)और बहुत से इंसेक्टिसाइड और पेस्टीसाइड भी होते हैं. चूहों पर किए गए प्रयोग दर्शाते हैं कि गौमूत्र पीने से लिवर में विकृति तथा पीलिया भी हो जाते हैं (doi: 10.4254/wjh.v9.i31.1205). भारतीय बाजार में उपब्ध 10 कंपनियों गौमूत्र उत्पादों पर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसन्धान संस्थान इज्जतनगर 2023-2024 में किये शोध से विदित होता है  (DOI: 10.31080/ASMI.2024.07.1358), कि 10 में से एक भी कंपनी का उत्पाद जीवनमुक्त नहीं था और उनमें प्रति ग्राम 10 हजार से 10 लाख तक मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए संभावित हानिकारक जीवाणु उपस्थित थे. अतः गौमूत्र उत्पादों (गौमूत्र अर्क, और गौमूत्र पाउडर) के उपभोक्ता ध्यान दें कि गौमूत्र अमृत नहीं है ना ही हानिरहित पानी है.

गौमूत्र से बने पोछा लगाने के लिए बने उत्पाद (जैसे कि गोनाइल और परी) भी जीवाणुओं को मारने में कारगर नहीं पाए गए  और उनकी उपयोगिता सिर्फ भ्रामक है .

कम्पनिया जिनके गौमूत्र उत्पाद जांच के लिए सीधे कंपनियों या फिर बाजर से भारतीय पशु चिकित्सा अनुसन्धान संस्थान इज्जतनगर  द्वारा लिए गए (Comparative Antimicrobial Potential of Commercial and In-house Urine and Urine Products of Different Origins, March 2024, ACTA SCIENTIFIC MICROBIOLOGY, DOI: 10.31080/ASMI.2024.07.1358उनके पते निम्नलिखित हैं:

  • 1.        Divya Godhan Ark, Divya Pharmacy, Haridwar, 100% pure cow urine distillate;
  • 2.        Godhan Ark, Yog Guru Bhairav Mandir, Kankhal, Haridwar, 96.5% Gaumutr Ark, 0.5% each of Tulsi, Gulab petal and Neem leaves extract, 0.5% Sounth;
  • 3.        Jeevan Ras Gaumutra Ark, Axiom Ayurvedic Pvt. Ltd. Ambala, Haryana, Gaumutra Ark with Tulsi, Rose and Neem juice;
  • 4.        Kamdhenu Ark, Deen Dayal Kamdhenu Gaushala Pharmacy, Farha, Mathura, 100% Gaumutra Ark with Tulsi;
  • 5.        Gaumata Ark, Punarnava Ayurvedic Co., Ambala, Haryana, Gaumutra 94%,1% each extract of Neem, Tulsi, Rose, Sheesham leaves, Kachnar and Moringa leaves;
  • 6.        Maven and Bloom Gaumutra, Jaiswal Industries, Indrapuram Ghaziabad, 100% Pooled whole Deshi Cow-heifer urine Organic;
  • 7.        Pure and Pooled whole Deshi cow urine, Hanumat Grih Udyog, Para, Lucknow, Pooled whole Desi Cow Urine;
  • 8.        Desi Cow Gaumutra, Hetha Organics LLP, Sikan-darpur, Ghaziabad, UP, 100% Pooled whole Gir, Sahiwal, Tharparkar cow urine;
  • 9.        Gir Cow urine: Pitambary Products Pvt. Ltd, 174 GIFC Estate, Karali, Vadodara, Gujarat;
  • 10.   Gir cow urine powder: Pitambary Products Pvt. Ltd, 174 GIFC Estate, Waghodia, Vadodara, Gujarat
  • Two surface disinfectants tested:
  • 1.       Pari D-100 from Jharveda Udyam, Tupudava, Jharkhand and
  • 2.       Gaunyle from Patanjali Gyamodyog, Nyas, Bhadaurpur Saini, Haridwar.

Sunday, July 26, 2026

समय की कीमत (Value of Time)

 समय की कीमत

समय की कीमत अक्सर हमें परीक्षा के समय, बीमारी में, और मुश्किल में पता चलती है अन्यथा हम अक्सर समझते हैं कि मेरा समय सबसे कीमती है तुम्हारे पास बर्बाद करने के लिए बहुत समय है. समय ऐसी चीज है कि आपके पास जितनी ताकत होती है उसे बर्बाद करने में आपको उतना ही ज्यादा  मजा आता है, या मजे करने को ही आप समय की उपयोगिता मानते हैं, और उस समय आपके पास कोई कितने ही आवश्यक कार्य से आये आप उसे अहमियत नहीं देते बल्कि उसे समय की बर्बादी मानते हैं. आप (आम आदमी ) भारत के किसी सरकारी दफ्तर में जाओ (प्राइवेट कार्यालय में तो उनका काम होगा तभी आपसे बात हो पाएगी) ,और कोई काम के लिए कहो तो आपको अगली तारीख या इन्तजार करने को कहा जाएगा, परन्तु अगर आपके पास प्रशासनिक या पैसे या राजनैतिक या फिर बाहुबल (गुंडागर्दी)  की ताकत है तो आपका काम फटाफट हो जाएगा, लाइन में लगे लोगों से पहले. और इन ताकतवर लोगों की आदत हो जाती है अपने काम फटाफट करवाने की, इन्हे इन्तजार करना गवारा नहीं होता चाहे इन्हे ये भी पता ना हो कि उस कार्य के होने में समय भी लग सकता है. मुझे ये अनुभव कई बार हुए हैं क्योंकि मेरा काम था क्लिनिकल सैंपल को एनालिसिस करके सही रोग या सही दवा का चयन करके डाक्टर के लिए रिपोर्ट देना. 

एक बार (2001) बरेली के जिलाधिकारी की पत्नी को मूत्राशय संक्रमण था और उनका अर्दली मूत्र का नमूना लेकर आया जिसके साथ सन्देश भी था कि जाँच की रिपोर्ट हाथ के हाथ दें , मैंने अर्दली को कहा कि रिपोर्ट दो दिन बाद ही मिलेगी, तो अर्दली ने रौब दिखाया कि आपको अंदाजा भी है कि यह किसका सैंपल है, मैंने कहा की इस प्रयोगशाला में नाम का कोई उपयोग नहीं हैं सैंपल नंबर मायने रखता है. उसने तुरंत ही अपने साहब को फ़ोन लगाया और बात करने के बाद मुझे फ़ोन देकर कहा, अब बात करो, साहब ने छूटते ही कहा कि दो घंटे में रिपोर्ट दो नहीं तो आपका क्या होगा मुझे नहीं पता. मैंने कहा आप जिलाधिकारी हैं और मैं आपका हुक्म मानने के लिए बाध्य हूँ परन्तु मूत्र के नमूने में जो जीवाणु हो सकते हैं वे आपका हुक्म नहीं मानते, न वे मेरा आदेश मानेगे, वे तो अपनी ही गति चलते हैं अतः आप मेरे साथ जो करना चाहें करें परन्तु रिपोर्ट तो तीसरे दिन से पहले नहीं मिलेगी और हो सकता चार दिन या ज्यादा भी लग जाएँ. चाहे तो आप अपने सैंपल को आप किसी और प्रयोगशाला में भिजवा सकते हैं. 

एक बार और (२००३) बरेली के बिशप महोदय का मूत्र नमूना आया, उन्हें भी समझाना पड़ा कि जीवाणु मेरा, और उनका (भगवान के दूत) कहना नहीं मानते. 

पैसे वाले लोग तो अक्सर समझते हैं कि समय पैसे का गुलाम है और वे लोग अक्सर कोशिश करते हैं कि समय को पैसे से खरीदा जा सकता है और वे लोग अक्सर ज्यादा फीस और रिश्वत की पेशकश करते रहते थे जल्दी रिपोर्ट के लिए, नेता जी और बाहुबलियों की तो बात ही निराली होती है उनसे निबटना और उन्हें समझाना बहुत ही मुश्किल होता है कि बहुत से काम उनके हुक्म के नहीं समय के गुलाम होते हैं. 

आम इंसान के समय की कोई कीमत नहीं होती इसका पता लगाना हो या फिर समझाना हो तो आप भारतीय प्रशासन और भारतीय पुलिस, और भारतीय न्याय व्यवस्था (न्यायालयों) के पास जाएँ शायद आपकी मृत्य आपके समय को उनसे पहले पहचान ले . 

एक बार जब मैं एक डायरेक्टर था (२०१४, बागपत) अर्थात मेरे समय की भी कीमत थी मुझे दिल्ली कृषि  मंत्रालय में पशु-स्वास्थय संयुक्त सचिव महोदय ने 10 बजे मिलने को बुलाया और जब मैं पहुंचा तो एक घंटा इन्तजार करने को कहा, एक घंटे बाद पहुंचा तब फिर दो घंटे इन्तजार करने को कहा, दो घंटे बाद कहने लगे कि लंच टाइम हो रहा है तीन बजे आना, फिर मेरा सब्र टूटा और मैंने कहा कि अब मैं जा रहा हूँ और अगली बार मुझे तभी बुलाना जब आपके पास समय हो वर्ना मेरा समय बर्बाद करने का प्रयास मत करना उसकी कीमत आपके समय से ज्यादा है क्योंकि सरकार मुझे आपसे ज्यादा वेतन देती है, और मैं कार्यस्थल पर लौट गया. शायद यह साहब को नागवार गुजरा, कुछ दिन बाद कृषि मंत्रालय के सचिव ने मुझे शाम को तीन बजे मिलने के लिए बुलाया, और शायद सजा देने के लिए ही इंतजा करने को कहा, मैं वहीं उनके कार्यालय के असिस्टेंट के पास बैठ गया और हर 15 मिनट पर वहां से फ़ोन करवाया परन्तु वही इन्तजार करो, आखिर मैं 5 बजे उनके कार्यालय में उनके अस्सिटेंट के मना करने के बावजूद घुंस गया और देखा साहब झपकी ले रहे हैं, वापस आकर मैंने एक ईमेल सचिव और मंत्री महोदय को लिखा और बताया कि उन्होंने मेरा कितना समय, मेरे ड्राइवर का समय नष्ट किया है, उसकी कितनी सरकारी कीमत है, आने जाने में जो खर्चा और समय लगा उसका हिसाब बताकर कहा कि  आपने उच्च पद का दुरूपयोग करके सरकारी धन की कितनी हानि की है उसकी भरपाई आपका कर्तव्य बनता है. उसके बाद मुझे कभी किसी ने फालतू नहीं  बुलाया, और बुलाया तो 5 मिनट से ज्यादा इंतजार नहीं कराया. 

और आजकल जबकि मैं सेवानिवृत्त हूँ मेरे समय की कोई कीमत नहीं है फिर भी पता नहीं क्यों न्यायालय समझता कि मेरा समय बर्बाद करके वह कुछ बड़ा कर रहा है, चलो जज महोदय को भी समझने दो कि वे बड़े शक्तिशाली हैं और उन्हें मेरा और मेरे जैसे लोगो का समय (जिसकी कीमत पता नहीं क्या है) बेकार करने की स्वतंत्रता है. कभी कभी लगता है कि जब हमें अपने ताकत के नशे में लगता है कि औरों के समय की कोई कीमत नहीं है तब शायद हम अपना ही समय व्यर्थ कर रहे होते हैं.  

सन्देश: आपको अपने समय की कीमत स्वयं निश्चित करनी होती है (तभी संभव है यदि आपके पास कोई ताकत है, अन्यथा आपकी कीमत कोई नहीं आंकेगा), यदि आप आम आदमी है तो मैं इतना ही कहूंगा कि बंद कर दो आम आदमी होना या फिर इंसान होना. 

यह भारत है, है मिट्टी का भी मोल यहाँ, इंसान की कीमत कोई नहीं. 

Sunday, May 31, 2026

लोरीगीत

 लोरी, जिसे सुनकर मेरी नातिन ७-८ मिनट में सो जाती है.

पालने में लिटाकर उसके साथ ॐ का उच्चारण जितनी लम्बी सांस हो सके उतना खींचकर ३-४ बार उसके साथ करता हूँ. साथ ही उससे आँख बंद करने का आग्रह करता हूँ. 

फिर ये लोरीगीत: उसके सोने तक, बस  

सो जा राजकुमारी सो जा , सो जा, सो जा, सो जा, सो जा , सो जाआआआ.  

सो जा राजकुमारी सो जा.

सो जा राजकुमारी सो जा , सो जा, सो जा, सो  जा, सो जा , सो जाआआआ.  

सो जा राजकुमारी सो जा.

अँखियों में तेरी निंदिया आये,

भर-भर सपने लेकर आये. 

सपने में तेरे चिड़िया आये, 

चिड़िया चुग्गा लेकर आये,

चूं -चूं कर वो खाना खाये,

पानी पीकर गाना गाये,

सो जा राजकुमारी सो जा , सो जा, सो जा, सो  जा, सो जा , सो जाआआआ,  

सो जा राजकुमारी सो जा.

Audio link:

https://drive.google.com/file/d/1aIVMlpgAVM9z96gqUXAIH3mHN5DhNF0s/view?usp=drive_link

Saturday, May 30, 2026

मरने की ख्वाहिश थी फिर भी मैं जी गया

मरने की ख्वाहिश थी फिर भी मैं जी गया 

मरने की ख्वाहिश थी हर पल, हर दिन, कितने ही साल से

फिर भी जाने मैं, क्यों इतने साल सिद्दत से जी गया.

अश्क भी क्या पीने की चीज थी जो पीता रहा उम्र भर,

पर उनका नशा ऐसा लगा कि हर रोज हर बार पी गया

दर्द तो बहुत दिए थे जिंदगी ने हर कदम पर

पर हर दर्द को मैं मरने की ख्वाहिश में पी गया.

दुश्मनों को भी दोस्त समझता रहा बहुत दिन क्योंकि 

जानता था मरे हुए को मारकर कभी क्या कौन ले गया.

सच में मरे हुए मुझे एक अरसा गुजर गया,

फिर जाने क्यों मैं इतने साल मर-मर के जी गया.

मुर्दे भी हंसते और मुस्कुराते हैं अब मुझे पूरा यकीन है

तभी तो मैं इस तरह मुस्कुरा कर हँस-हँस के जी गया.

लोग कहते हैं कि इस तरह जिंदगी एक ख्वाब है,

और मैं हूं कि इस ख्वाब को मर-मर के जी गया.

कभी खुशी, कभी गम, कभी घबराकर पी गया

जीना नहीं था एक पल फिर कैसे बरसों मैं जी गया.

किसी और की नहीं थी औकात जो जख्म दे-दे मुझे,

और जो अपनों ने दिए जख्म उन्हें भी हँस-हँस  के सी गया.

क्या इसी को जीना कहते हैं, यही सोचता हूं हर वक्त

हर बार मरने की जगह मैं कुछ साल और जी गया.

जिंदगी मुझे तेरी जरूरत नहीं थी दो कदम भी

पर मरने की आरजू में मैं तुझको भी हँस-हँस जी गया.

दुनिया कहती है जहर खाकर मर जाओ,

पर क्या करूं, मैं तो जहर पीकर भी इतने साल जी गया.

हर रोज मैं अपनों के दिए जहर पीता रहा, मुसल्सल,

जाने वो कैसा जहर था कि मैं मर-मर के जी गया.

मौके और  बहाने बहुत थे मरने और जीने के भी,

रोज मरने की चाह में मैं मौके और  बहाने को जी  गया.

जिंदगी तो जहर थी, और मेरी तो मरने की आरजू थी

जहर भी क्या पीने की चीज थी जो इतनी शिद्दत से पी गया.

दवा के नाम पर हर रोज बिकता है जहर मेरे देश में

कितनी गोलियां खायीं फिर भी बेतरह बेकार में जी गया.